हर कोदारी आ संगही जलखय सतुआ छै : मैथिली गजल । विरेन्द्र कुमार सिंह

शेयर गर्नुहोला

मैथिली गजल
बान्हिले पगड़ी मिथलाक लाेग नै पछुआ छै
हर, कोदारि आ संगहि जलखए, सतुआ छै

ले खाे भाई, रमाे भाई इहे छी गिर्हत जिनगी
राजनीतिमें किरा फर्लै, लुब्धल सङ्रथुआ छै

कौहरी काटय भल पन्डितबा, सुपता कहने
कि करबिहीक, कुर्सीपर ओ, एकलतुआ छै

चर्लै नेता एकभरसँ सगरे, गणतन्त्रक ई पंघी
डाँइरह खिच्ने ओ दर्बर दए, जेना कछुआ छै

जाईत सोह्रौने, कुटुम सोह्रौने खुशी-मङनमें
धन अर्जलेल् काेन धाेंछिया देश-बेचुआ छै ?

विरेन्द्र कुमार सिंह (कुशवाहा)
हाल – दोहा कतार
सिरहा अर्नमा गाउँपालिका-३ (लाल्पुर चौक)

पछाडि पोस्टनेपाल राहत शिक्षकको प्रदेश नं २ को अधिबेशन सम्पन, सम्पुर्ण सदस्य निर्बिरोध चयन
अगाडि पोस्टबुद्धिजीवी एबं पेशाकर्मिहरुको आन्दोलन संयोजन समिति